सी पी आई ने मोदी सरकार की की आलोचना

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*अमेरिकी साम्राज्यवाद के आगे मोदी सरकार के आत्मसमर्पण की सीपीआई कड़ी निंदा करती है*
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला कोरबा के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौता किसानों और ग्रामीण महिलाओं को तबाह कर देगा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मोदी सरकार द्वारा अमेरिकी साम्राज्यवाद के दबाव में अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क की अनुमति दिए जाने की कड़े शब्दों में निंदा करती है। यह फैसला भारतीय किसानों, खेत मज़दूरों और विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात है, जो पहले से ही गहरे संकट में हैं।
15 अगस्त 2025 को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए “व्यक्तिगत रूप से भारी कीमत चुकाने” की बात कही थी। आज वही प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देशों के आगे शर्मनाक ढंग से झुकते हुए भारी सब्सिडी प्राप्त अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाज़ार में बेरोकटोक प्रवेश की अनुमति दे रहे हैं। यह कदम भारतीय कृषि को तबाही की ओर धकेल देगा।
2015 की कृषि जनगणना के अनुसार भारत में 14.65 करोड़ परिचालित जोतें हैं और देश की 48 प्रतिशत कार्यबल तथा लगभग 65 प्रतिशत आबादी कृषि एवं सहायक क्षेत्रों पर निर्भर है। इसके विपरीत अमेरिका में केवल 18.8 लाख किसान हैं। यह असमान और अन्यायपूर्ण व्यापार समझौता भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर कर, करोड़ों किसान परिवारों—खासकर महिला किसानों और कृषि मज़दूर महिलाओं—की आजीविका छीन लेगा।
अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिन्स ने स्वयं स्वीकार किया है कि इस समझौते का उद्देश्य भारत के विशाल बाज़ार में अधिक अमेरिकी कृषि उत्पाद भेजकर अमेरिका के 1.3 अरब डॉलर के कृषि व्यापार घाटे को कम करना है। जहाँ अमेरिकी सरकार अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा कर रही है, वहीं मोदी सरकार भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने का काम कर रही है—यह अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
देशभर की किसानों, खेत मज़दूरों, महिलाओं और मेहनतकश जनता से आह्वान करती है कि
12 फ़रवरी को प्रस्तावित आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए‌ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मजदूर, किसानों और ग्रामीण महिलाओं के साथ कंधे से कंधा जनविरोधी फैसलों के ख़िलाफ़ संघर्ष जारी रखेगा।