कांगेर घाटी में मिली अनोखी “ग्रीन गुफा”, पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

जल्द खुलेंगे पर्यटन के नए द्वार, स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर। छत्तीसगढ़ की जैव विविधता और प्राकृतिक धरोहरों के लिए विख्यात कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में एक और दुर्लभ प्राकृतिक चमत्कार सामने आया है। यहां “ग्रीन केव” (ग्रीन गुफा) नामक एक अनोखी गुफा की खोज की गई है, जो अपनी विशिष्ट संरचना और हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतों के कारण पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बनने जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य सरकार पर्यटन और वन्य धरोहरों के संरक्षण-संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वन मंत्री कश्यप ने कहा कि ग्रीन गुफा के पर्यटन मानचित्र में शामिल होने से कांगेर घाटी को एक नई पहचान मिलेगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि, स्थानीय रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।कोटुमसर परिसर में स्थित है।

ग्रीन गुफाग्रीन गुफा कोटुमसर परिसर के कंपार्टमेंट क्रमांक-85 में स्थित है। इस गुफा की दीवारों और छत से लटकती चूना पत्थर की आकृतियों (स्टैलेक्टाइट्स) पर हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतें पाई जाती हैं, जो इसे अन्य गुफाओं से अलग बनाती हैं। इसी विशेषता के कारण इसे “ग्रीन केव” नाम दिया गया है।प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा अनुभवग्रीन गुफा तक पहुंचने का मार्ग बड़े-बड़े शिलाखंडों से होकर गुजरता है। गुफा में प्रवेश करते ही हरी परतों से ढकी दीवारें मन मोह लेती हैं। भीतर एक विशाल कक्ष है, जहां चमकदार स्टैलेक्टाइट्स और फ्लो-स्टोन संरचनाएं गुफा की प्राकृतिक भव्यता को अद्भुत रूप प्रदान करती हैं।पर्यटकों के लिए जल्द खुलेगी गुफावन विभाग द्वारा गुफा की सुरक्षा, संरक्षण और नियमित निगरानी की जा रही है। साथ ही पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहुंच मार्ग, पैदल पथ और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास का कार्य प्रगति पर है। सभी तैयारियां पूर्ण होने के बाद ग्रीन गुफा को शीघ्र ही पर्यटकों के लिए खोले जाने की योजना है।
वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन रहा महत्वपूर्ण: इस पहल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवासन तथा प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण पांडे का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है। उनके नेतृत्व में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को अंतरराष्ट्रीय स्तर के इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं




