ग्राम पंचायतों में भी DMF की राशि की जमकर हुई अफरा तफरी, पूर्व महिला सरपंच पर लगे लाखों रुपए के गबन के आरोप

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जांजगीर। प्रदेश के अनेक जिलों में DMF के फंड की जमकर बंदरबांट हुई। ऐसे में ग्राम पंचायत कहां पीछे रहते। ऐसा ही एक मामला जांजगीर जिले की प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत में सामने आया है जहां की पूर्व सरपंच के ऊपर DMF तथा मूलभूत मद के लाखों रुपए के गबन के आरोप लगे हैं।

जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम पंचायत महका की पूर्व सरपंच मंजू लता टंडन पर लाखों रुपए के गबन का आरोप लगा है। ये आरोप पंचायत की वर्तमान सरपंच शांति बाई खूंटे द्वारा लगाया गया है।

शिकायत में आरोप है कि मंजू टंडन ने सीसी रोड और नाली निर्माण जैसे कई विकास कार्यों के लिए जारी की गई राशि की पहली किश्त को निकाल लिया, लेकिन उससे संबंधित कोई भी काम नहीं कराया।

वर्तमान सरपंच शांति बाई खूंटे ने कार्यों का ब्यौरा देते हुए बताया है कि पूर्व सरपंच मंजू टंडन ने इन कार्यों के लिए पहली किश्त की राशि 12 लाख 40 हजार रुपए निकाल लिए हैं, मगर धरातल पर इनमें से कोई भी काम नजर नहीं आ रहा है। इनमें ज्यादातर कार्य डीएमएफ की रकम से स्वीकृत थे। जो इस प्रकार हैं:

1. सी.सी. रोड निर्माण कार्य नल जांगडे के घर से खुलुराम के कुआ तक स्वीकृत राशि 10.00 लाख (डी.एम.एफ मद )

2. सी.सी. रोड निर्माण कार्य सरजु टण्डन के घर से दिलीप के घर तक स्वीकृत राशि 10.00 लाख (डी.एम.एफ मद)

3. सी.सी. रोड निर्माण कार्य रामकुमार चौहान के घर से गौठान तक स्वीकृत राशि 06.00 लाख (डी.एम.एफ मद)

4. नाली निर्माण कार्य पूर्व माध्यमिक शाला से नाला तक स्वीकृत राशि 05.00 लाख (15वें वित्त जिला स्तर)

इस पूरे मामले को लेकर सरपंच शांति बाई खूंटे ने कलेक्टर, एसडीएम और जनपद पंचायत पामगढ़ में शिकायत दर्ज कराई है।

क्या केवल सरपंच ने की है अफरा तफरी

पंचायत के लाखों रुपए के निर्माण कार्यों की रकम को अकेले सरपंच ने हड़प लिया हो ऐसा संभव नजर नहीं आता। अमूमन कलेक्टर कार्यालय से लेकर जनपद और फिर पंचायत तक सभी की इसमें सहभागिता होती है। चूंकि निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत होती है, इसलिए संबंधित पंचायत के नाम पर राशि जारी की जाती है, फिर सरपंच–सचिव द्वारा रकम निकाली जाती है और नीचे से ऊपर तक सभी को कमीशन बांटा जाता है। इसके बाद निर्माण कार्य की शुरुआत की जाती है। चूंकि ग्राम पंचायत महका में इससे संबंधित कोई कार्य ही नहीं हुआ है तो सबसे पहले पूर्व सरपंच और तब के सचिव पर गाज गिरना तय है, वहीं अगर निष्पक्षता से जांच की जाए तो जनपद के तत्कालीन सीईओ और अन्य जिम्मेदार भी लपेटे में आएंगे।

बहरहाल गबन की शिकायत के बाद अब इस मामले को लेकर न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि पंचायत की राजनीति में भी उबाल आ रहा है।