हाई कोर्ट की सख्ती – नदियों के उद्गम स्थल तलाशने और संरक्षण के लिए बनेगी कमेटी।।
राज्य की नदियों के उद्गम स्थल क्यों सूख रहे हैं और इनका संरक्षण कैसे हो, इसे लेकर हाईकोर्ट ने मंगलवार को अहम आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार नदियों के उद्गम स्थलों की पहचान कर उन्हें राजस्व रिकार्ड में दर्ज करे और संरक्षण के लिए कमेटी गठित करे।बतादें कि बिलासपुर की जीवनदायनी अरपा नदी समेत प्रदेश की नदियों के संरक्षण और संवर्धन की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि नदियों का उद्गम स्थल राजस्व रिकार्ड में नाले के रूप में दर्ज है, जिससे इनका महत्व घट रहा है। उन्होंने मांग की कि इन उद्गम स्थलों का हाइटेक सर्वे कराया जाए। इस पर 2 करोड़ 60 लाख रुपए का खर्च अनुमानित बताया गया था। आज सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि 6 प्रमुख नदियों – महानदी, हसदेव, तांदूला, पैरी, केलो और मांड के लिए पहले ही कमेटी का गठन किया जा चुका है। साथ ही अरपा नदी में सालभर पानी उपलब्ध कराने की योजना और प्रदेश की 9 बड़ी नदियों के पुनर्जीवन पर भी काम किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने आवेदन में मांगे गए हाइटेक सर्वे की अनुमति नहीं दी, लेकिन साफ कहा कि सभी नदियों और उनके उद्गम स्थल को राजस्व रिकार्ड में दर्ज किया जाए। कोर्ट ने सरकार को नदियों के संरक्षण पर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी।




