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तस्वीरों में काशी में गंगा दशहरा का महास्नान:84 घाटों पर उमड़े श्रद्धालु, मान्यता है आज ही धरती पर गंगा का हुआ था अवतरण

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Acn18.com/आज वाराणसी में गंगा दशहरा पर श्रद्धालु गंगा स्नान, दान, जप, तप, व्रत और उपवास कर रहे हैं। गंगा का धरती पर अवतरण होने वाले इस शुभ दिन पर काशी के 84 घाटों पर स्नान करने वालों की भीड़ है। घाटों पर स्नान के बाद श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालु गंगाजल से अभिषेक कर रहे हैं। श्रद्धालु सत्तू, घड़ा, पंखा आदि दान करते हैं।

दरअसल, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि को ही गंगा दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन गंगा धरती पर प्रकट हुई थीं। शास्त्रों के मुताबिक, गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करने से 10 जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। आगे तस्वीरों में गंगा दशहरा देखिए…

दशाश्वमेध घाट पर फ्लोटिंग जेट्टी और नावों के बीच स्नान के लिए कुंड बनाया गया है। कुंड के चारों ओर जाल बिछाए गए हैं। इसमें श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं।
गंगा दशहरा को देखते हुए काशी के घाटों पर वाराणसी पुलिस के साथ ही जल पुलिस और NDRF के जवान अलर्ट हैं।
घाटों पर गंगा आरती वाली जगह को फूलों की माला से सजाया गया है। विशेष पूजा और भव्य-दिव्य संध्या आरती की जाएगी।
10 अंक का आज विशेष महत्व
आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने कहा कि गंगा दशहरा पर 10 अंक का विशेष महत्व माना जाता है। गंगा दशहरा पर जो भी दान किया जाए, उसकी संख्या 10 होनी चाहिए। यही नहीं, पूजा के लिए उपयोग में आने वाली सामग्रियों की संख्या भी 10 हो, तो विशेष शुभ माना जाता है। मान्यता है कि आज गंगा स्नान करने से कई महायज्ञों के बराबर फल की प्राप्ति होती है।
कल होगी निर्जला एकादशी
गंगा दशहरा के बाद कल यानी 31 मई को निर्जला एकादशी मनाई जाएगी। इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि निर्जला एकादशी के व्रत से साल भर के समस्त एकादशी के व्रत का फल मिल जाता है। निर्जल और निराहार रहकर भक्तिभाव के साथ पीले वस्त्र पहनने होते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। दूसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है।