कोरबा में सीएसईबी के 2 अफसर निलंबित, पढ़ें पूरी खबर…

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के अधीन कोरबा में पदस्थ अधीक्षण अभियंता और कटघोरा के कार्यपालन अभियंता को निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन के संबंध में जारी आदेश के मुताबिक कोरबा जिले में विद्युत वितरण विभाग के सुपरिटेंडिंग इंजिनियर (SE) बी के सरकार और कटघोरा इलाके के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) अंशु वार्ष्णेय को निलंबित कर दिया गया है। अंशु वार्ष्णेय को निलंबित किया जाकर उनका मुख्यालय-कार्यपालक निदेशक (ज.क्षे.) घ.स्टेट पॉ. विस्ट्री.क. लिमि, जगलदपुर किया गया है और उनके स्थान पर शत्रुहन कुमार सोनी, कार्यपालन अभियंता (संचा./संघा.) संभाग, छ.स्टेट पॉ. डिस्ट्री. कं. लिमि, कोरबा को पदस्थ किया गया है। सोनी अपने कार्य के अतिरिक्त कार्यपालन अभियंता (संचा/संधा) संभाग, छ. स्टेट पॉ.डिस्ट्री.कं. लिमि, कटघोरा के कार्यों का भी संपादन आगामी आदेश तक करेंगे।
वजह का खुलासा करने से बचते रहे अफसर
कोरबा में पदस्थ इन अधिकारियों के निलंबन आदेश पर पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के कार्यपालक निदेशक ए के अंबष्ट के हस्ताक्षर हैं, मगर जब अंबष्ट से निलंबन की वजह की जानकारी चाही गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि आदेश एच आर से आया था, वे तो सिर्फ फॉरवर्डिंग ऑफिसर हैं। इसी तरह कुछ स्थानीय और प्रदेश स्तर के अफसरों ने कुछ भी जानकारी होने से इंकार कर दिया।
इस बड़ी कार्यवाही की क्या थी वजह..
जिले के दो बड़े अफसरों पर हुई इस बड़ी कार्यवाही की तह तक जाने पर पता चला कि पॉवर कंपनी के एम डी भीम सिंह की नाराजगी के चलते इनके ऊपर गाज गिरी है। हुआ यूं कि भीम सिंह अपने अमले के साथ बीते 10 मार्च को कोरबा दौरे पर आए और यहां उन्होंने कॉफी प्वाइंट के आगे स्थित ग्राम दूधीटांगर में ट्रांसफार्मर स्थापित करने के लिए भूमिपूजन किया। इस गांव में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाली विशेष संरक्षित जनजाति कोरवा समुदाय की बहुलता है।
ग्राम दूधीटांगर के बाद भीम सिंह लेमरू इलाके में स्थित ग्राम देवपहरी पहुंचे। यह स्थान खूबसूरत झरने के लिए मशहूर है। बता दें कि भीमसिंह के साथ उनकी पत्नी मंजुला सिंह भी उपस्थित रहीं। बताया जा रहा है कि देवपहरी में बिजली विभाग द्वारा समाधान शिविर का आयोजन किया गया था।
ग्रामीणों ने बताई बिजली की समस्या
इस शिविर में ग्रामीणों ने एम डी भीम सिंह को बताया कि गांव में लो वोल्टेज की समस्या है, वहीं बिजली कई दिनों तक गुल रहती है। ग्रामीणों से बात करने के बाद भीम सिंह देवपहरी में संचालित गौमुखी सेवा धाम गए जहां आदिवासी बच्चों के लिए स्कूल चलाया जा रहा है। यहां भी बच्चों ने बताया कि बिजली की काफी समस्या है। इसकी जानकारी मिलने पर भीम सिंह ने मौके पर मौजूद सुपरिटेंडिंग इंजिनियर बी के सरकार और कटघोरा के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर अंशु वार्ष्णेय को निर्देश दिया कि वे इस गांव तक 11 केवी की विद्युत लाइन खींचने के लिए स्टीमेट बनाकर प्रपोजल तत्काल मुख्यालय भेजें, वे तुरंत इसे सैंक्शन कर देंगे।
प्रस्ताव में देरी से नाराज हुए एमडी
दरअसल इस संबंध में निर्देश देकर एमडी भीम सिंह रायपुर रवाना हो गए। इस बीच बताया जाता है कि कटघोरा के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर अंशु वार्ष्णेय ने प्रस्ताव बनाकर सुपरिटेंडिंग इंजिनियर बी के सरकार को सौंप दिया था, मगर इस अफसर ने ध्यान नहीं दिया और फाइल अटक गई, इस बीच हफ्ते भर बीत गए। उधर एमडी भीम सिंह को याद था कि आदिवासी बाहुल्य इलाके देवपहरी के लोगों को बिजली की समस्या से निजात दिलाना है। उन्होंने इस कार्य में हो रही देरी की वजह जानने के लिए अफसरों को लगाया। तब पता चला कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह नौबत आई है।
कोरबा के बिजली अफसरों की नाफरमानी से नाराज एमडी भीम सिंह ने दोनों को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया, वहीं देवपहरी गांव तक तत्काल 11 केवी की बिजली की लाइन खींचने का आदेश भी उन्होंने जारी कर दिया। फिर क्या था, एमडी के आदेश का पालन करते हुए अफसरों ने इलाके के बिजली ठेकेदार को बुलाकर तुरंत बिजली की लाइन खिंचवाई।
ईद के दिन गांव में पहुंची बिजली
एमडी भीम सिंह के आदेश का यह असर रहा कि देवपहरी गांव तक आनन फानन में उच्च दाब की लाइन पहुंचाई गई और यह संयोग था कि ईद के त्यौहार के दिन 21 मार्च को इस गांव को बिजली से रौशन कर दिया गया।
जिले में दूसरी बार हुई कार्यवाही
बता दें कि जिले में बिजली विभाग के अफसरों की लापरवाही का यह दूसरा मामला है जिसमें निलंबन की कार्यवाही की गई है। इससे पूर्व कोरबा के कार्यपालन अभियंता (परियोजना) संभाग, जितेंद्र कुमार सिंह को निलंबित किया गया था। इस अफसर पर कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत को गलत जानकारी देने का आरोप है।
गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व ही कोरबा जिले में दीपका इलाके में एक बिजली अफसर को रिश्वत लेते हुए एसीबी ने ट्रैप किया था। दरअसल अफसरों की तथाकथित लापरवाही की मूल वजह भी यही रिश्वतखोरी है। सरकार मुफ्त बिजली योजना सहित कई योजनाएं चला रही है, और इनको अमल में लाने के लिए अफसरों को लगभग हर रोज मोटी रकम टेबल के नीचे से मिलती है। सच तो यह है कि आज के समय में आम आदमी का अपने घर पर बिजली का मीटर भी लगवाना टेढ़ी खीर हो गया है। हां, अगर वह दलालों के जरिए अफसरों तक रिश्वत पहुंचा देता है तो उसका कनेक्शन तत्काल हो जाएगा। मुख्यालय में बैठे अफसरों को अपने एसी कमरों से निकल कर एमडी भीम सिंह की तरह आम लोगों के बीच जाना होगा, तभी लोगों की परेशानियां दूर होंगी और बिजली अधिकारियों की मनमानी पर रोक लग सकेगी।



