हरदीबाजार में उफान — एसईसीएल दीपका प्रबंधन के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बोले “झूठे वादों से नहीं, हक से होगा फैसला!”
एसईसीएल दीपका प्रबंधन की नीतियों के खिलाफ हरदीबाजार में आज जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। तहसील कार्यालय में आयोजित त्रिपक्षीय वार्ता को ग्रामवासियों ने पूरी तरह बहिष्कृत कर दिया और गेट के बाहर ही एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बैठक को अस्वीकार कर दिया। ग्रामीणों का साफ कहना था — “जब तक पुराने वादों पर अमल नहीं होता, तब तक नई बैठक का कोई मतलब नहीं।”
सुबह से ही हरदीबाजार तहसील कार्यालय का परिसर प्रदर्शन स्थल में बदल गया। सैकड़ों ग्रामीण तख्तियाँ और बैनर लेकर पहुंचे और एसईसीएल प्रबंधन पर वादाखिलाफी और दबाव की राजनीति करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने कई बार सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा है, लेकिन प्रबंधन ने आज तक एक भी मांग पूरी नहीं की।
ग्राम सरपंच लोकेश्वर कंवर, पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर, समाजसेवी नरेश टंडन, अजय दुबे, अनिल टंडन, विजय जायसवाल, श्याम जायसवाल, रामशरण कंवर सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा — “जब तक हक नहीं मिलेगा, तब तक वार्ता नहीं होगी। हरदीबाजार अब जाग चुका है।”
हालांकि बैठक में एसडीएम पाली, अपर कलेक्टर, और एसईसीएल दीपका प्रबंधक मौजूद थे, लेकिन ग्रामीणों ने कार्यालय में प्रवेश तक नहीं किया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक हरदीबाजार के नाम पर रखी गई थी, लेकिन उसमें बाहरी लोगों को बैठाया गया, जबकि जिन लोगों के हितों की बात थी, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
इसी दौरान मालगांव और आमगांव के कुछ ग्रामीण, जिनके मकान छह महीने पहले अधिग्रहण के दौरान तोड़े गए थे और जिनका मुआवजा अब तक नहीं मिला, वे भी बैठक में पहुंचे और अपनी व्यथा अधिकारियों के सामने रखी।
ग्रामवासियों ने चेतावनी दी कि एसईसीएल दीपका प्रबंधन यदि जबरन सर्वे या नापी की कार्रवाई करता है, तो पूरा हरदीबाजार सड़कों पर उतर आएगा। उनका कहना है कि जो हाल आमगांव और मालगांव का हुआ, वैसा हरदीबाजार के साथ नहीं होने देंगे।
ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा — “प्रबंधन के वादे सिर्फ कागजों में हैं, धरातल पर कुछ नहीं। पहले अधिग्रहण प्रभावितों को न्याय मिले, पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए, तभी वार्ता संभव है।”
गुस्साए ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रबंधन दोनों को साफ चेतावनी दी —
“हरदीबाजार बिकेगा नहीं, झुकेगा नहीं। हक की लड़ाई अब सड़कों से होकर दिल्ली तक जाएगी!”




