साथ जिए और साथ ही निकल पड़े अंतिम सफर पर

दुर्ग जिले के सिकोला बस्ती में रहने वाले तिलक और शीतल कुर्रे की कहानी ने पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई को दर्शाया है। यह रिश्ता सिर्फ सात फेरों का बंधन नहीं, बल्कि जीवन भर के संघर्षों और सहारा बनने की कहानी भी है। तिलक (50) और शीतल (40) ने न केवल अपनी पूरी जिंदगी साथ मिलकर हर मुश्किल का सामना किया, बल्कि अंत में मौत का सफर भी उन्होंने एक साथ ही तय किया।
दुर्ग ज़िले के सिकोला बस्ती में तिलक और शीतल कुर्रे ने जीवनभर साथ संघर्ष किया। आर्थिक तंगी से परेशान तिलक ने आत्महत्या की। पत्नी शीतल, अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद, पति की मौत के एक घंटे बाद ही चल बसीं,यह परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। तिलक पेंटिंग का काम करते थे और उनकी पत्नी शीतल मजदूरी कर उनका साथ देती थीं। उनके दो बेटे थे। बड़ा बेटा (24) मारपीट के एक मामले में 15 दिनों से जेल में था और छोटा बेटा (17) किसी तरह घर का खर्च चला रहा था।इसी बीच, परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब शीतल की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उनकी आंत का बड़ा ऑपरेशन हुआ, जिसमें 10 बोतल खून चढ़ाया गया। ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन अस्पताल का भारी भरकम खर्च और घर की बिगड़ती माली हालत ने परिवार को बुरी तरह से तोड़ दिया। वार्ड की पूर्व पार्षद उषा ठाकुर ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि बिजली भी कट चुकी थी। सारी जिम्मेदारी छोटे बेटे के कंधों पर आ गई थी, जिससे तिलक की मानसिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी,इसी मानसिक दबाव और आर्थिक तंगी से परेशान होकर 31 अगस्त की शाम करीब 4 बजे तिलक ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिवार ने पत्नी शीतल को इस दुखद खबर से दूर रखा, क्योंकि वह अस्पताल में भर्ती थी। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। पति की मौत के ठीक एक घंटे बाद, अस्पताल में भर्ती शीतल की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन 1 सितंबर की सुबह 5 बजे उन्होंने भी अपनी अंतिम सांस ली।
इस दुखद घटना ने पूरे मोहल्ले को सदमे में डाल दिया है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि तिलक और शीतल का रिश्ता इतना गहरा था कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर पाई। उन्होंने जीवन भर हर मुश्किल का सामना साथ किया और अंत में उनका सफर भी एक साथ ही खत्म हुआ। यह कहानी पति-पत्नी के रिश्ते की एक ऐसी मिसाल बन गई है, जहां जिंदगी के साथ-साथ मौत भी एक हो गई। अब उनके दोनों बेटे इस गहरे दुख और अनिश्चित भविष्य का सामना अकेले करने के लिए मजबूर हैं।




