शांति और प्रेम के रास्ते पे लौटे नक्सली जोड़ा,पुलिस के समक्ष किया आत्मसमर्पण,थाना परिसर में सजा मंडप रीति रिवाज के साथ हुई नक्सल जोड़े की शादी ,देखिए वीडियो

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थाने में नक्सली जोड़े की शादी

..यह हैं दूल्हा सागर दिर्दो और दुल्हन सचिला मंडावी……..कभी जंगल के रास्तों पर बंदूक के साए में जीने वाले ये दोनों आज जीवन के नए सफर पर निकले हैं……शांति और प्रेम के रास्ते पर।दोनों ने कुछ माह पहले पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।नक्सलवाद की अंधेरी दुनिया को छोड़कर उन्होंने समाज में लौटने का साहस दिखाया,और अब उसी साहस ने उन्हें विवाह के बंधन में बाँध दिया है। आज पखांजूर थाना परिसर में मंडप सजा, फूलों से सजी चौकी और परंपरागत ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच दोनों ने सात फेरे लिए।पंडित के मंत्रोच्चारण और फूलो की जयमाल ध्वनियों के बीच सागर और सचिला ने एक-दूसरे का हाथ थाम लिया।इनकाऊंटर स्पेशलीस्ट लक्ष्मण केंवट और निरीक्षक रामचंद्र साहू समेत पुलिस अधिकारी, ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता इस पल के साक्षी बने।विवाह पूरी हिंदू परंपराओं के साथ सम्पन्न हुआ।

…ये विवाह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जो बंदूक से नहीं, बल्कि भरोसे से समाज को जोड़ती है।जो हिंसा छोड़ना चाहता है,उसके लिए समाज और प्रशासन दोनों के द्वार खुले हैं। कभी जिन हाथों में बंदूक थी,अब वही हाथ वरमाला थामे हुए थे।कभी जो कदम जंगल की राहों पर भटके,अब वही कदम समाज की मुख्य सड़क पर लौट आए हैं। दूल्हा सागर और दुल्हन सचिला अब गोपनीय सैनिक के रूप में कार्यरत हैं।यानी अब वे उसी तंत्र का हिस्सा हैं जो कभी उनके खिलाफ था।दूल्हा बने सागर वर्ष 2014 मे नक्सल संगठन से जुड़ा और पखांजूर पुलिस के समक्ष सितंबर 2024 मे आत्मसमर्पण कर दिया।इसके आलावा दुल्हन बनी संजिला गढ़चिरौली मे वर्ष 2020 मे नक्सल संगठन से जुड़ी और वर्ष जून 2024 मे बांदे पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।धीरे धीरे दोनों की पहचान हुई और विवाह करने का फैशला लिया।और पुलिस के अधिकारिओ ने आज उनका विवाह संपन्न कराया। यह बदलाव न केवल उनकी ज़िंदगी का है,बल्कि पूरे इलाके के लिए उम्मीद का संदेश है।

..विवाह पूरी सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के साथ सम्पन्न हुआ।पंडित के मंत्रोच्चारण के बीच थाना परिसर में ‘जयमाल’ और ‘फेरे’ की रस्में निभाई गईं। पुलिस अधिकारी, ग्रामीण, और सामाजिक संगठनों के लोग इस अद्भुत पल के साक्षी बने।थाना प्रभारी से लेकर स्थानीय ग्रामीणों तक सबके चेहरों पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी।क्योंकि आज पखांजूर थाना सिर्फ कानून व्यवस्था का केंद्र नहीं,बल्कि एक नई कहानी का जन्मस्थल बन गया था वह है शांति, प्रेम और विश्वास की कहानी।

सागर और सचिला अब गोपनीय सैनिक के रूप में कार्यरत हैं।उन्होंने नक्सलवाद छोड़कर देश की सेवा और समाज के विकास में योगदान देने का निर्णय लिया है।थाना परिसर में जब शादी के गीत गूंजे, तो आसपास के ग्रामीणों ने इसे एक ‘नई शुरुआत’ का प्रतीक माना। लोगों ने कहा अगर ये दोनों हिंसा छोड़ सकते हैं, तो यह इलाके के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बनेंगे।

कभी जिन हाथों में बंदूक थी, अब उन्हीं हाथों ने एक-दूसरे का जीवन थामा है।कभी जिन कदमों ने जंगल की पगडंडियां नापी थीं,अब वे समाज के बीच नई राह पर बढ़ रहे हैं।पुलिस की इस पहल ने एक ऐसी कहानी गढ़ दी है जो बताती है“गोलियों से नहीं, प्रेम से ही शांति की राह निकलती है।”