भारतमाला प्रोजेक्ट में मुआवजा पाने के लिए बनाये गए सैकड़ों पोल्ट्री फॉर्म शेड पर चला प्रशासन का बुलडोजर

धरमजयगढ़। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ इलाके में जिस भूभाग पर भारतमाला प्रोजेक्ट की सड़क प्रस्तावित है, वहां बड़ी संख्या में किसानों ने पोल्ट्री फार्म शेड का निर्माण कर लिया था। शिकायतों के बाद आज प्रशासन ने सभी शेड पर बुलडोजर चलवा दिया। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने इससे पूर्व नोटिस जारी किया था, जिसके खिलाफ कुछ ग्रामीण हाई कोर्ट चले गए। इस मामले में सुनवाई होती, इससे पहले ही प्रशासन ने यह कार्रवाई कर दी, जिससे गांव में तनाव फैल गया।
धरमजयगढ़ इलाके से होकर गुजरने वाली भारतमाला परियोजना की सड़क को एक प्लांट के चलते कुछ डाइवर्ट करना पड़ा। इसके लिए धरमजयगढ़ के मेडरमार और बायसी कॉलोनी के बीच का भूभाग चिन्हित किया गया। इसके लिए जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना प्रकाशित करने की प्रक्रिया चल रही थी। चूंकि अधिसूचना के बाद से निर्माण कार्य और जमीनों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, इसलिये जमीन मालिकों और दलालों के लिए यह अच्छा अवसर था। मौका देखकर यहां प्रस्तावित सड़क वाले भूभाग में बमुश्किल 15 दिनों के भीतर सौ से भी अधिक शेड खड़े कर दिया गया। यहां केवल शेड बनाया गया, ताकि सर्वे के दौरान उनके निर्माण को पोल्ट्री फार्म के रूप में चिन्हित कर लिया जाये, और उन्हें इसके एवज में लंबा-चौड़ा मुआवजा मिल सके।
रायगढ़ जिले के लारा, धरमजयगढ़ और तमनार इलाके में इससे पहले भी बड़े पैमाने पर मुआवजा घोटाला उजागर हो चुका है। वहीं भारतमाला प्रोजेक्ट में एक और घोटाले की तैयारी चल रही थी, जिसकी जानकारी हाल ही में पदस्थ SDM नवीन भगत को लग गयी। यह मामला मीडिया में भी सुर्खियां बना। इसे देखते हुए उच्चाधिकारियों से मिले दिशानिर्देश के बाद SDM ने किसानों को शेड हटाने का नोटिस जारी कर दिया था। प्रशासन द्वारा 13 अगस्त को जारी नोटिस में साफ कहा गया था कि 28 अगस्त तक स्वयं शेड हटा लें, अन्यथा प्रशासन कार्रवाई करेगा।
जब प्रशासन ने नोटिस जारी किया तब दलाल स्टे के लिए किसानों को लेकर हाईकोर्ट चले गए। हालांकि कोर्ट में कुछ सुनवाई होती, इससे पहले ही प्रशासन की टीम आज सुबह बड़ी संख्या में बुलडोजर लेकर पहुंची और शेड को ढहाना शुरू कर दिया। यहां एक-एक करके सभी शेड जमींदोज कर दिए गए।
इस कार्रवाई से प्रभावित अनेक किसानों का कहना है कि अपनी जमीन पर वे मुर्गी और बकरी पालन का काम करते थे और इससे उनकी रोजी-रोटी चल रही थी। वे प्रशासन की इस कार्यवाही के खिलाफ कोर्ट जायेंगे। वही प्रशासन अपनी कार्यवाही को नियमानुसार बता रहा है। बिना अनुमति के मुआवजा पाने के फेर में इस तरह केवल शेड का निर्माण कर लिया गया, जिसे गलत मानते हुए प्रशासन ने यह कार्यवाही की है।




