बांध का तटबंध ढहने से देर रात आई बाढ़ : तीन घरों के साथ आठ लोग बहे, 4 के शव मिले, चार की तलाश जारी

बलरामपुर। जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां अत्यधिक जल भराव से लुत्तीसढ़शा जलाशय ढह गया। बताया जा रहा है कि, यह बांध 1981 में मिट्टी से बना था। जलाशय के ढहने से 4 की मौत हो गई। कुछ लोग अभी भी लापता हैं और कई घर भी ढह गए।
जानकारी के अनुसार, बांध के पास में निर्मित तीन घर भी ढह गए। रात की तलाशी के दौरान बांध में डूबे 2 महिलाओं की लाश मिली है। जिसमें 6 लोगों की तलाश जारी रही। दोनों मृत महिला एक ही परिवार की सदस्य हैं। जिनका रिश्ता सास और बहु का है। वहीं सुबह की रेस्क्यू ऑपरेशन में एक महिला और एक पुरुष का शव बरामद हुआ है। जबकि चार अब भी लापता हैं।
लगातार बारिश से तटबंध हुआ कमजोर
लगातार तेज बारिश होने के कारण लुतिया डेम रात 10 बजे के करीब टूट गया। बताया गया है कि पहाड़ में तेज बारिश होने के कारण झरने का पानी बांध में आ रहा था और उसके बाद बांध लबालब भर गया और देखते ही देखते पूरा बांध टूट गया लेकिन इस दौरान पहले से यहां पर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया था और न ही जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे हुए थे। यही वजह है कि यहां पर ऊंचाई में मकान बनाकर रह रहे दो परिवार के लोग गहरी नींद में जब सोए हुए थे तब बांध के पानी की वजह से आने वाले बाढ़ में वे बह गए, घर का नामोनिशान मिट गया।
रात करीब 3 बजे कलेक्टर राजेंद्र कटारा और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और उन्होंने रेस्क्यू टीम के माध्यम से दो लोगों की लाश को मौके से बरामद किया। लापता लोगों की तलाश एसडीआरएफ की टीम के द्वारा किया जा रहा है.
डैम में रिसाव हो रहा था लेकिन नहीं दिया ध्यान
डैम फूटने से आई बाढ़ में कई मवेशी भी बह गए हैं। दूसरी तरफ स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से डेम में रिसाव हो रहा था, इसके बाद भी जल संसाधन विभाग के अधिकारी इसकी मरम्मत नहीं कर रहे थे, जबकि इस साल लगातार पिछले दो महीने से अत्यधिक बारिश हो रही है, उसके बावजूद जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने यहां पर पहले से कोई अलर्ट जारी नहीं किया था और न ही मुनादी कराया था अगर ऐसा किया गया होता तो लोगों की जान नहीं गई होती।
बताया गया है कि डैम का निर्माण पहाड़ी के नीचे किया गया है और इसका निर्माण 5 दशक पहले किया गया था लेकिन जल संसाधन विभाग के अधिकारी वास्तविक रूप से इस डैम की मरम्मत नहीं कर रहे थे सिर्फ कागजों में ही हर साल मरम्मत किया जाता था। यही वजह है कि इस साल डेम तेज बारिश के बीच बह गया।




