स्पष्टवक्ता, विद्वान और संवेदनशील जननेता — बनवारीलाल अग्रवाल का निधन, एसीएन न्यूज़ परिवार की ओर से विन्रम श्रद्धांजलि

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*स्पष्टवक्ता, विद्वान और संवेदनशील जननेता — बनवारीलाल अग्रवाल का निधन, एसीएन न्यूज़ परिवार की ओर से विन्रम श्रद्धांजलि*

कोरबा।
छत्तीसगढ़ की राजनीति और सामाजिक जीवन के एक स्वर्णिम अध्याय का आज अंत हो गया।
राज्य विधानसभा के पहले उपाध्यक्ष, दो बार के विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री बनवारीलाल अग्रवाल का आज लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
पिछले दो दिनों से वे अपने निवास पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे।
उनके निधन से न केवल कोरबा बल्कि पूरे प्रदेश में गहरा शोक व्याप्त है।
उन्हें अंचल में उनके स्नेही नाम ‘बनवारी भैया’ के तौर पर जाना जाता था। उनकी अंतिम यात्रा आज, 16 अक्टूबर 2025 को दोपहर 3 बजे उनके निवास स्थान (दुरपा रोड) से शुरू होकर मोतीसागर पारा, कोरबा स्थित मुक्तिधाम जाएगी।
शोकाकुल परिवार में पत्नी पुष्पा अग्रवाल,महावीर प्रसाद अग्रवाल (भाई), भतीजे दिव्यानंद अग्रवाल, परमानंद अग्रवाल, हितानंद अग्रवाल एवं भरा पूरा गर्ग परिवार शामिल है।

*शिक्षक से जननेता तक का सफर*

1 मई 1947 को कोरबा के ग्राम जपेली में श्रीयार अग्रवाल के घर जन्में श्री बनवारीलाल अग्रवाल ने अपने जीवन की शुरुआत शिक्षा के क्षेत्र से की थी।
एक शिक्षक के रूप में उन्होंने समाज में ज्ञान, अनुशासन और सादगी के संस्कार बोए।
बाद में उन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया।
वे दो बार अविभाजित कटघोरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे (1993-2003) और छत्तीसगढ़ विधानसभा के पहले उपाध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल में लोकतांत्रिक परंपराओं को नई गरिमा दी।

कोरबा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कई विकास योजनाओं को धरातल पर उतारा।
उनकी प्रशासनिक दक्षता और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा ने उन्हें आम लोगों के बीच सम्मानित और विश्वासयोग्य बनाया।

*पत्रकार कमलेश यादव की स्मृतियों में जीवंत ‘बनवारी भैयाIMG 20251015 WA0071’*

वरिष्ठ पत्रकार एवं एसीएन न्यूज़ के संपादक कमलेश यादव ने अपने संस्मरण में लिखा —

> “मेरे 34 साल के पत्रकारिता जीवन में उनके जैसा विद्वान, समझदार और तर्कशील नेता नहीं देखा।
वे स्थानीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय विमर्श तक हर विषय में गहरी समझ रखते थे।
हिंदी पर उनकी पकड़ विलक्षण थी और अंग्रेज़ी में उनकी अभिव्यक्ति प्रभावशाली।”

*कमलेश यादव ने आगे लिखा —*

> “करीब एक दशक तक हम साथ में ‘हेडलाइंस अभीतक’ कार्यक्रम का संचालन करते रहे।
हर सुबह जब वे स्टूडियो में आते थे, तो माहौल स्वतः गंभीर और बौद्धिक हो जाता था।
वे हर मुद्दे को तथ्यों और तर्कों के साथ जोड़ते थे, जिससे न सिर्फ दर्शक बल्कि मैं स्वयं भी उनसे सीखता था।”

*बृजमोहन अग्रवाल के साथ यादगार मुलाकात*

कमलेश यादव ने एक विशेष प्रसंग साझा किया —

> “एक बार उन्होंने तत्कालीन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को ‘अभीतक’ के दफ्तर बुलाया।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा — ‘आओ, तुम्हें एक छुपे खजाने से मिलाता हूँ।’
कैमरे के सामने हमारी बातचीत लंबी चली।
सूबे के विकास पर बृजमोहन जी ने सरकार के प्रयासों की चर्चा की, वहीं बनवारीलाल जी ने सकारात्मक सुधारों के सुझाव रखे।
उस दिन मैंने फिर से इस बात को महसूस किया कि वे आलोचक नहीं, बल्कि समाधान प्रस्तुत करने वाले विचारक हैं।”

*स्पष्टवादिता और सिद्धांतों की राजनीति*

बनवारीलाल अग्रवाल का जीवन राजनीति से अधिक सिद्धांतों का था।
वे समझौते की राजनीति में विश्वास नहीं रखते थे।
स्पष्ट और निर्भीक विचार ही उनकी पहचान बने।
उनकी राजनीतिक टीम भले छोटी रही, पर उसमें विश्वास और निष्ठा की नींव मजबूत थी।

उनका एक किस्सा तब बहुत मशहूर हुआ था जब उन्होंने विधानसभा उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था, 28 मार्च 2001 को उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा उपाध्यक्ष की शपथ ली थी लेकिन उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने से एक दिन पहले ही उन्होंने 09 मार्च 2003 में अपना इस्तीफा दे दिया था। वे वोटिंग से डरते नहीं थे बल्कि उस अंसतोष से वे नाराज़ थे जो उनके खिलाफ बेवजह फैलाया जा रहा था। बाद में उनके धर्मजीत सिंह ठाकुर को 13 मार्च 2003 में विधानसभा उपाध्यक्ष चुना गया।

*करीबियों के कहने मात्र से ले ली याचिका वापस*

2008 में वे बेहद कम अंतर से चुनाव हारे थे।
उन्होंने परिणाम को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी,
लेकिन कुछ करीबियों के आग्रह पर बाद में उसे वापस ले लिया।
वे स्वयं कहा करते थे —

> “अगर याचिका वापस नहीं लेता, तो निर्णय मेरे पक्ष में आता, लेकिन जनता की इच्छा मेरे लिए सर्वोपरि थी।”

*साहित्य, अध्ययन और भाषाई प्रतिभा*

वे जीवन भर अध्ययनशील और जिज्ञासु बने रहे।
अक्सर कहते थे कि वे धरप्रवाह अंग्रेज़ी केवल अंग्रेजी अखबारों का नियमित पाठन करके सीखे हैं।
उनकी यह आत्मशिक्षा उनकी बौद्धिक क्षमता का प्रमाण थी।
वे साहित्य के प्रेमी थे, हिंदी लेखन से गहराई से जुड़े और युवाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे।

*अंतिम संस्कार कोरबा के मोतीसागर पारा में किया जाएगा।*
सुबह से ही श्रद्धांजलि देने के लिए शहरवासी और राजनीतिक-सामाजिक संगठन उनके निवास पर पहुंच रहे हैं।

*विद्वता, मर्यादा और सेवा का युग समाप्त*

श्री बनवारीलाल अग्रवाल के निधन से छत्तीसगढ़ ने एक ऐसा नेता खो दिया,
जिसके पास विचारों की गहराई, भाषा की शक्ति और जनसेवा का जुनून था।
वे उन विरल नेताओं में से थे जो सत्ता से अधिक समाज के उत्थान पर ध्यान देते थे।
उनकी अनुपस्थिति प्रदेश की राजनीति में एक गहरा खालीपन छोड़ गई है।

*एसीएन न्यूज़ परिवार की ओर से श्रद्धांजलि*

“सादगी, विद्वता और स्पष्टवादिता का नाम था बनवारीलाल अग्रवाल।
उनके जाने से छत्तीसगढ़ की राजनीति ने अपना विवेक और बौद्धिक संतुलन खो दिया है।”

– एसीएन न्यूज़ परिवार