*क्योटी जलप्रपात बना पर्यटकों का आकर्षण केंद्र, लेकिन सुरक्षा इंतजाम नाकाफी, प्रशासन से सख्ती की मांग
*
रीवा का प्रसिद्ध क्योटी जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों से गुलजार है। जुलाई में कम बारिश के चलते सूखा सा दिखने वाला यह जलप्रपात अब अगस्त की बारिश के बाद अपने पूरे शबाब पर है। महाना नदी पर स्थित यह जलप्रपात भारत का 24वां सबसे ऊंचा जलप्रपात है, और अब इसमें अच्छा-खासा जलस्तर बह रहा है, जो पर्यटकों को खूब लुभा रहा है। शनिवार, रविवार और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के मौके पर यहां पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ी है, जिनमें रीवा के अलावा यूपी-बिहार से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं।
भाजपा मंडल लालगांव के उपाध्यक्ष गौरव शुक्ला ने बताया कि कोरोना काल के बाद से क्योटी जलप्रपात पर पर्यटन गतिविधियों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यह रीवा का ऐसा स्थान बन गया है, जहां लोग परिवार और दोस्तों के साथ बार-बार आना पसंद करते हैं। हालांकि उन्होंने चिंता जताई कि प्रशासन की ओर से यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। न तो जलप्रपात के खतरनाक किनारों पर बैरिकेडिंग है, न ही रेस्क्यू के लिए कोई स्थाई इंतजाम। साथ ही पास का ऐतिहासिक किला भी जर्जर हालत में है, जहां लोग जाने से डरते हैं।
बीते कुछ समय में यहां पर कई दर्दनाक हादसे भी हो चुके हैं। 19 जुलाई 2024 को प्रयागराज की 25 वर्षीय वर्तिका पटेल की सेल्फी लेते समय फिसलकर क्योटी वॉटरफॉल में गिरने से मौत हो गई थी। वे अपने पति और परिवार के साथ रीवा घूमने आई थीं और यह हादसा महज तीन महीने की नवविवाहित ज़िंदगी को निगल गया। इस घटना के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।
हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे पर्यटन के दौरान सावधानी बरतें, किनारों और खतरनाक स्थानों पर जाकर सेल्फी या स्टंटबाजी न करें। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें।
प्राकृतिक सौंदर्य और शांति के लिए क्योटी जलप्रपात एक आदर्श स्थल है, लेकिन बढ़ते हादसों को देखते हुए यहां मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है। अगर सरकार इस स्थल को पर्यटन हब के रूप में विकसित करे और जरूरी सुविधाएं मुहैया कराए, तो यह न सिर्फ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि पर्यटन के जरिए आर्थिक लाभ का भी बड़ा स्रोत बन सकता है।




