बारिश में खरीदी केंद्रों में सड़ रहा धान, सरकार को हो रहा करोड़ों का नुकसान

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बीजापुर। प्रदेश भर में सरकार द्वारा ख़रीदे गए धान की नीलामी चल रही है। चूंकि खरीदी केंद्रों में रख रखाव के अभाव में धान ख़राब हो रहा है, इसलिए व्यापारी भी धान की बोली काफी कम दर पर लगा रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में धान खरीदी केंद्रों का बहुत ही बुरा हाल है। बीजापुर जिला भी इन्हीं में शामिल है।

बीजापुर जिले के 16 धान उपार्जन केंद्रों में अब भी करीब 49,502 बोरी धान बिना उठाव के खुले में पड़ा हुआ है। यह धान पिछले छह महीने से उठाव का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक मिलर्स द्वारा प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। उठाव की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2025 बीत चुकी है। लगातार हो रही बारिश के चलते अब यह धान सड़ने और अंकुरित होने लगा है, जिससे उसकी गुणवत्ता और वजन दोनों में गिरावट आई है।

धान संग्रहण समितियों के प्रबंधकों ने सोमवार को कलेक्टर से मिलकर जल्द उठाव कराने की मांग की। प्रबंधकों ने बताया कि धान को तिरपाल से ढंककर रखने के बावजूद बारिश और चूहों से भारी नुकसान हो रहा है। कई केंद्रों में बोरे फट चुके हैं और अनाज खराब हो चुका है। उन्होंने बताया कि उठाव में देरी से भंडारण लागत (सूखत) बढ़ती जा रही है, जिसका बोझ समितियों और कर्मचारियों पर पड़ता है, जिसकी वसूली भी उन्हीं से की जाती है।

आवापल्ली, मोदकपाल, इलमिडी, संकनपल्ली, उसूर, कुटरू, कोशलनार, गुदमा, भद्रकाली, धनोरा, पापनपाल, फरसेगढ़, कोंगूपल्ली, मिरतुर, मद्देड़ जैसे कुल 16 उपार्जन केंद्रों में धान का उठाव अब तक अधूरा है।

धान उठाव की तय समय-सीमा के बावजूद प्रशासन और मिलर्स के बीच समन्वय का अभाव अब हजारों बोरी धान की बर्बादी की वजह बन गया है। समितियों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद मिलर्स धान उठाने नहीं पहुंचे, जिससे अब खराब अनाज के चलते आर्थिक नुकसान की आशंका गहराने लगी है

जिला विपणन अधिकारी टामेश सिंह नागवंशी ने उठाव में हुई गड़बड़ी को स्वीकार करते हुए बताया कि मार्च अंत तक सभी केंद्रों का डीओ कट चुका था। हालांकि समितियों की ओर से हमाल उपलब्ध नहीं कराए गए और दूसरी ओर मिलर्स ने भी सुस्ती दिखाई। उन्होंने कहा कि मिलर्स पर पेनल्टी की कार्रवाई की जा रही है, और अन्य जिलों से समन्वय कर प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की तैयारी है।

यह नजारा केवल बीजापुर जिले का नहीं है, बल्कि जहां भी धान की ज्यादा खरीदी हुई है वहां ऐसे ही हालात हैं। सरकार द्वारा धान की बंपर खरीदी के चलते अब हजारों करोड़ का नुकसान हो रहा है, वहीं सरकार पर कर्ज का बोझ बढ़ता ही जा रहा है।